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मीराबाई ने गाया- ‘सत की नाव खेवटिया सतगुरु, भवसागर तर आयो।’ सत्य की नाव का...

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उपनिषद् के ऋषियों ने ब्रह्म को ‘सत्य’ कहा। सर्वव्यापी, लेकिन अनिर्वचनीय या वर्णनातीतईश्वरीय तत्व को...

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प्रायः मनुष्य स्थूलता में जीने का अभ्यस्त होता है। वह प्राणी-पदार्थों के बाहरी आवरण में...

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आजकल बच्चों को स्कूल में आत्मविश्वास सिखाते हैं। जबकि बच्चा तो स्वभावतः ही आत्मविश्वासी होता...

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एक बार स्वयं को नास्तिक कहनेवाले एक प्रबुद्ध सहमानव ने पूछा कि ‘जैन और बौद्ध...

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गांधीजी जब साधना मार्ग में नए थे तो कहते थे कि ‘ईश्वर सत्य है’। सबको...

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हमारे पूर्वजों में विश्व को समझने की सहज जिज्ञासा थी। उनकी बुद्धि पर पहले के...

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क्रांति क्या है ?  जब क्रमण करते हैं, आगे की ओर बढ़ते हैं, तब क्रांति...

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सत्य को हम कैसे समझें? दार्शनिक तर्कणाओं से अलग उसे व्यावहारिक रूप में कैसे समझें?...

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